Tuesday, June 19, 2012
Monday, June 4, 2012
uttar pradesh or uttam pradesh.......
आज सोचा तो आंसू भर आये
मुद्दते हो गयी मुस्कुराये .
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Monday, January 16, 2012
विरोध का लोकतांत्रिक तरीका
Sunday, January 15, 2012
u.p.elections...........
पक्के समाजवादी है, तस्कर हो या डकैत
इतना असर है खादी के उजले लिबास में |
Thursday, August 13, 2009
नत कर दो मस्तक मेरा..................
नत करदो मस्तक मेरा अपनी चरण-धूल में,
अंहकार डूबा दो मेरा सारा अश्रूजल में।
करने स्वयं को गौरव-दान करता केवल निज अपमान,
बार बार चक्कर खा-खाकर मरता हूँ पल-पल में।
अंहकार डूबा दो मेरा सारा अश्रूजल में।
Wednesday, August 12, 2009
कुछ नज्में.............
नींद इस सोच से टूटी अक्सर
किस तरह कटती हैं रातें उसकी - परवीन शाकिर
ऐसे मौसम भी गुजारे हमने
सुबहें जब अपनी थीं शामें उसकी - परवीन शाकिर
आंखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते
अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते - अकबर इलाहाबादी
अब ये होगा शायद अपनी आग में खुद जल जायेंगे
तुम से दूर बहुत रह कर भी क्या पाया क्या पायेंगे - अहमद हमदानी
ये खुले खुले से गेसू, इन्हें लाख तू सँवारे
मेरे हाथ से संवरते, तो कुछ और बात होती- आगा हश्र
कुछ तुम्हारी निगाह काफिर थी
कुछ मुझे भी खराब होना था - मजाज लखनवी
न जाने क्या है उस की बेबाक आंखों में
वो मुंह छुपा के जाये भी तो बेवफा लगे- कैसर उल जाफरी
किसी बेवफा की खातिर ये जुनूं फराज कब तलक
जो तुम्हें भुला चुका है उसे तुम भी भूल जाओ- अहमद फ़राज
काम आ सकीं न अपनी वफायें तो क्या करें
इक बेवफा को भूल न जायें तो क्या करें- अख्तर शीरानी
इस से पहले कि बेवफा हो जायें
क्यों न ऐ दोस्त हम जुदा हो जायें- अहमद फराज
इस पुरानी बेवफा दुनिया का रोना कब तलक
आइए मिलजुल के इक दुनिया नई पैदा करें- नजीर बनारसी
हम अक्सर दोस्तों की बेवफाई सह तो लेते हैं
मगर हम जानते हैं दिल हमारे टूट जाते हैं- रोशन नंदा
अर्ज है................
हमको तो गर्दिश-ए-हालात पे रोना आया ,रोने वाले तुझे किस बात पे रोना आया - सैफुद्दीन सैफ
हर शम्आ बुझी रफ्ता रफ्ता ,हर ख्वाब लुटा धीरे - धीरे ,शीशा न सही पत्थर भी न था, दिल टूट गया धीरे - धीरे - कैसर उल जाफरी
ए मौत, उन्हें भुलाए जमाने गुजर गए, आजा कि जहर खाए जमाने गुजर गए - खुमार बाराबंकवी
एक रंगीन झिझक एक सादा पयाम ,कैसे भूलूं किसी का वो पहला सलाम - कैफी आजमी
मैं चाहता भी यही था वो बेवफा निकले ,उसे समझने का कोई तो सिलसिला निकले - वसीम बरेलवी
अपने चेहरे से जो जाहिर है छुपाएं ,कैसे तेरी मर्जी के मुताबिक नजर आएं कैसे - वसीम बरेलवी
शबाब आया किसी बुत पर फिदा होने का वक्त आया ,मेरी दुनिया में बंदे के खुदा होने का वक्त आया - हरीचंद अख्तर
साफ जाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं ,मुंह से कहते हुये ये बात मगर डरते हैं - अख्तर अंसारी
सोचा था कि तुम दूसरों जैसे नहीं होगे ,तुमने भी वही काम मेरी जान किया है - अफजल फिरदौस
एक टूटी हुई जंजीर की फरियाद हैं हम ,और दुनिया ये समझती है कि आजाद हैं हम - मेराज फैजाबादी
देख लो आज हमको जी भर ,के कोई आता नहीं है फिर मर के - मिर्जा शौक
किस-किस तरह से मुझ को न रुस्वा किया गया, गैरों का नाम मेरे लहू से लिखा गया - शहरयार
मैनोशी के आदाब से आगाह नहीं है तू, जिस तरह कहे साकी-ए-मैखाना पिए जा - अख्तर शीरानी
मैं नजर से पी रहा हूं, ये समां बदल न जाए ,न झुकाओ तुम निगाहें, कही रात ढल न जाए- अनवर मिर्जापुरी
पहलू से दिल को लेके वो कहते हैं नाज ,से क्या आएं घर में आप ही जब मेहरबां न हों - मौलाना मुहम्मद अली जौहर
तुम्हारी बेखुदी ने लाज रख ली वादाखाने की ,तुम आंखों से पिला देते तो पैमाने कहां जाते - शकील बदायूंनी
कटी रात सारी मेरी मैकदे में,खुदा याद आया सवेरे-सवेरे - सैयद राही
ऐसे भी हैं दुनिया में जिन्हें गम नहीं होता, एक हम हैं हमारा गम कभी कम नहीं होता - रियाज खैराबादी
मय रहे मीना रहे गर्दिश में पैमाना रहे ,मेरे साकी तू रहे आबाद मैखाना रहे - रियाज खैराबाडी